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वर्चुअल स्कूल ऑफ़ वैदिक संस्कृत
आत्मीय प्रिय भारतवासी! संस्कृत एवं वैदिक ज्ञान परंपरा के संवाहक जिज्ञासु बन्धुओं ! आप सभी को मेरा सादर अभिवादन। मैं डॉ. मदन मोहन तिवारी संस्थापक वर्चुअल स्कूल ऑफ वैदिक संस्कृत तथा प्राक्तन प्राध्यापक वेद विभाग महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल हरियाणा अपने जीवन के 15 वर्षों की संस्कृतविद्या की शैक्षणिक यात्रा के अनुभव को समाज के उन सांस्कृतिक चेतना के उपासकों तक पहुंचाना चाहता हूँ जिनकी जिज्ञासा का परिशमन संस्कृत की उपयोगी एवं प्रमाणिक जानकारी की पहुंच सहज रूप में आभासीय पटल के माध्यम से हो सके। जिसे प्रत्यक्ष रूप से दिल्ली में और भारत के अन्य राज्यों में ऑनलाइन माध्यम से जूड़ने के लिए तथा साक्षात् कक्षा के लिए इस प्लेटफार्म से प्रशिक्षित संस्कृत स्कॉलर से जूड़ने के लिए जिज्ञासुजनों को यह अवसर उपलब्ध कराता है। इस प्रकल्प के द्वारा वेदविद्या की जन जन तक सामान्य एवं सहज रूप में पहुंच हो सके, इस दृष्टि से इस प्रकल्प की आवश्यकता है। जिससे जो भी भारतीय नागरिक और पाश्चात्य देश के संस्कृत जिज्ञासु हैं जिन्हें संस्कृत ज्ञान विज्ञान की समृद्ध परंपरा का लेशमात्र भी बोध नहीं है,उनको भारतीय ज्ञान की सुदीर्घ परंपरा का दिग्दर्शन करने के लिए यह प्रकल्प हमने आरंभ किया है।।
इस मंच से वैदिक वाङ्गमय में प्रतिपादित जीवन पद्धपि, गुरुकुलीय शिक्षाव्यवस्था के सामान्य अंश जो आधुनिक विषय के छात्रों के लिए अनिवार्य है, को सीखाना तथा संस्कृत के ज्ञान से भौतिकता को आध्यात्मिक ज्ञान से संतुलित करना है। इसमें व्यवहारिक एवं जीवनोपयोगी विन्दुओं की शिक्षा सम्मिलित है। वैदिकसंस्कृत जीवन शैली से वर्तमान नगरीय जीवन संबंधी विविध समस्याओं के उन्मूलन हेतु वैदिक प्रयोग संस्कृत के अध्ययन से जीवन की उपयोगिता को परिभाषित करने के उद्देश्य से तथा दैनिक नित्य पूजा पद्धति का प्रशिक्षण, मंदिर प्रबंधन प्रशिक्षण , संस्कार एवं ज्ञान विज्ञान के सभी भारतीय परंपरा को हम इस प्लेटफार्म के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक उनकी जिज्ञासा के आधार पर उचित मार्गदर्शन एवं ऑनलाइन ऑफलाइन कक्षाओं के माध्यम से उपर्युक्त सुविधा प्रदान करेंगे ।वेद विद्या से जूड़कर जीवन को उन्नत मार्ग प्रदान करने की दिशा में हम और हमारी यह शैक्षिक संस्था पूर्ण मनोयोग से कार्य क कर रही है।
- हम विविध बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उन्नयन के उद्देश्यों के साथ आप सभी के आशीर्वाद से स्वरोजगार की भावना से प्रधानमंत्री जी के लोकल फाॅर वोकल इस विजन के साथ इसके विस्तार से संस्थागत लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की भावना से यह संकल्प आप सभी के आशीर्वाद एवं सहयोग से सफल होगा।इस विश्वास के साथ इस प्रकल्प को आरंभ कर रहा हूं। इस वर्चुअल स्कूल की आवश्यकता और उपयोगिता के विषय में विचार करें तो इसकी आवश्यकता इसलिए है क्योंकि समय की मांग है कि हम केवल पैकेज वाले इन्जीनियर मेडिकोज, बैकर,इन्डस़्ट्रियल, व्यापारिक, व्यवसायिक मात्र न होकर सम्पराय अर्थात् मृत्यु के बाद के जीवन को भी सुखद बनाने वाले बनें । इस लिए ऐसे प्रकल्पों की आवश्यकता है, जिससे वेल क्वालिफाई लोग अपने सामान्य वैदिक ज्ञान विज्ञान एवं संस्कृत विद्या के अमृतत्त्व से वंचित न रहें।यह संस्था मल्टीनेशनल कम्पनीज के संस्कृत लोगो(प्रतीक चिह्न) निर्धारण करने के लिए भी कार्य करती है। कम्पनीज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने उत्पादों के नाम का प्रयोग संस्कृत शब्दों के साथ कर कम्पनीज अपनी प्रसिद्धि संस्कृत जगत के करोड़ो लोगों तक कर सकती है, तथा कम्पनी अपना विज्ञापन संस्कृत में कराने के लिए इस संस्था का सहयोग ले सकती है।इत्यादि विविध कार्ययोजना को ध्यान में रखते हुए यह संस्था अपनी गुणवता एवं वचनबद्धता के लिए समग्र भारत में ही नहीं अपितु विश्व में अपनी पहचान बनायेगी ऐसी आशा एवं संकल्प है। इनमें सामाजिक व्यवसायिक धार्मिक एवं संस्कृत जगत के सभी संस्थानों का सहयोग अपेक्षित एवं ग्राह्य होगा। सधन्यवाद सभी आत्मीय जनों का सहयोगाभिलाषी।
डॉ. मदन मोहन तिवारी
संस्थापक – वर्चुअल स्कूल ऑफ वैदिक संस्कृत
Mobile- +91 8586806121, +91 8447646410
Vaishali Sector 5 Ghaziabad